द्वितीय अपील में जिलाधिकारी का कड़ा रुख, विद्युत विभाग के तीन अधिकारियों पर 5-5 हजार रुपये जुर्माना.

सीतामढ़ी। जिले में आमजन की समस्याओं के त्वरित और पारदर्शी समाधान के प्रति प्रशासन ने एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दिखाई है। लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत बुधवार को आयोजित द्वितीय अपील सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने विभागीय लापरवाही पर सख़्त रुख अपनाते हुए विद्युत विभाग के तीन अधिकारियों—लोक प्राधिकार सहायक विद्युत अभियंता, कनीय अभियंता और संबंधित कार्यपालक अभियंता—पर पाँच-पाँच हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाने का आदेश दिया। त्रुटिपूर्ण जांच और गलत बिल पर कार्रवाई।
सोनबरसा प्रखंड के एक परिवादी ने विद्युत विपत्र (बिजली बिल) में सुधार के लिए अपील दायर की थी। मामले की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट त्रुटियाँ पाई गईं और प्रथम अपील स्तर पर इस गंभीर गलती को नज़रअंदाज कर दिया गया था। द्वितीय अपील सुनवाई के दौरान जिलाधिकारी द्वारा जब मामले की समीक्षा की गई तो पता चला कि 575 रुपये के बदले 26,000 रुपये का बिल निर्गत किया गया था, जो पूरी तरह गलत था। इस त्रुटि को गंभीर मानते हुए जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों पर आर्थिक दंड का आदेश दिया और अगली तारीख को सभी अधिकारियों को उपस्थित रहने का निर्देश दिया। सात मामलों की सुनवाई, दो पर पारित हुआ आदेश।

लोक शिकायत निवारण अधिनियम के तहत हुई आज की सुनवाई में कुल 07 मामलों को सुना गया, जिनमें से 02 मामलों में आदेश पारित किए गए। डीएम ने निर्देश दिया कि किसी भी मामले में ढिलाई, लापरवाही या टालमटोल बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी विभाग समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करें। जनता दरबार में पहुँचे 86 फरियादी, डीएम ने दी त्वरित कार्रवाई के निर्देश।
जिला समाहरणालय में आयोजित जनता दरबार में आज कुल 86 लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। लोगों ने आवेदन देकर अपनी समस्याएँ रखीं, जिनमें भूमि विवाद, अर्जित भूमि का मुआवजा, सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ, नल-जल योजना का कार्य, नाली निर्माण, विद्युत संबंधी शिकायतें, स्वास्थ्य समस्याएँ, दिव्यांगों के UDID कार्ड, वृद्ध एवं विकलांगता पेंशन, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, अतिक्रमण और भूमि मापी जैसी विविध समस्याएँ शामिल रहीं।

जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने सभी आवेदकों की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि। जन शिकायतों के निष्पादन में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं है।
प्रत्येक आवेदन पर नियमानुसार और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि जनता से प्राप्त हर शिकायत का समाधान पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया जाए, ताकि आमजनों का प्रशासन पर विश्वास और मजबूत हो।
