भारत का रुपया क्यों कमजोर हो रहा है? पड़ोसी देशों की मुद्रा स्थिर, फिर भारत में गिरावट क्यों…

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National: हाल के दिनों में भारतीय रुपये में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है, जिससे आम लोगों से लेकर अर्थशास्त्रियों तक के बीच चिंता बढ़ गई है। वरिष्ठ पत्रकार प्रभाकर मिश्रा ने इस मुद्दे को उठाते हुए सवाल किया है कि जब नेपाल, भूटान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसी अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं स्थिर हैं, तो फिर भारतीय रुपया ही क्यों दबाव में है।


आर्थिक जानकारों के अनुसार रुपये की कमजोरी के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना है। वैश्विक बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने से उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव पड़ता है। इसके अलावा कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव भी रुपये को प्रभावित करता है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।


विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से पूंजी निकालना भी एक अहम वजह मानी जा रही है। जब विदेशी निवेश घटता है तो डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। साथ ही, वैश्विक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों से जुड़ी नीतियां भी रुपये की चाल को प्रभावित कर रही हैं।


हालांकि सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर बाजार में हस्तक्षेप कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन वैश्विक हालात के चलते अल्पकालिक दबाव बना हुआ है।


फिलहाल सवाल यही है कि क्या आने वाले समय में रुपये को मजबूती मिलेगी या आम जनता को महंगाई का और बोझ झेलना पड़ेगा। इस पर सबकी निगाहें सरकार और RBI की अगली रणनीति पर टिकी हैं।

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