10 हज़ारी स्कीम का बड़ा असर: हर बिहारी पर बढ़ा ₹27,000 का कर्ज़, सरकार की वित्तीय हालत बिगड़ती दिखी

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National: बिहार सरकार इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझती नज़र आ रही है। 10 हज़ारी स्कीम के बढ़ते बोझ और केंद्रीय सहयोग में कमी के बीच राज्य का कर्ज़ रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। ताज़ा विश्लेषण के मुताबिक, अब हर बिहारी के हिस्से में करीब ₹27,000 का कर्ज़ आ रहा है।


यदि केंद्र से अपेक्षित सहायता नहीं मिली, तो राज्य के करीब 10 लाख सरकारी कर्मचारियों की सैलरी पर भी संकट मंडराने की आशंका है। वहीं विकास योजनाएँ—जैसे सड़क, पुल, पुलिया और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट—लगभग ठप पड़ने की स्थिति में पहुँच सकती हैं।

कर्ज़ का बढ़ता सफ़र (वित्तीय वर्षवार):

2020-21: ₹36,297 करोड़

2021-22: ₹19,218 करोड़

2022-23: ₹28,349 करोड़

2023-24: ₹60,217 करोड़

2024-25: ₹63,666 करोड़

2025-26 (अनुमान): ₹55,737 करोड़


इन आंकड़ों से साफ है कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य का ऋण लगातार बढ़ा है और भविष्य में भी स्थिति गंभीर रह सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि राजस्व स्रोत नहीं बढ़े और व्यय नियंत्रित नहीं हुआ, तो बिहार की आर्थिक सेहत पर भारी असर पड़ेगा।

फिलहाल सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती—कर्मचारी वेतन, पेंशन और विकास योजनाओं को संतुलित तरीके से संभालने की है।

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