77वें गणतंत्र दिवस परेड में भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक वैभव का भव्य प्रदर्शन
नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड ने एक बार फिर दुनिया के सामने भारत की बढ़ती सामरिक ताकत, स्वदेशी रक्षा क्षमता और सांस्कृतिक विविधता की प्रभावशाली झलक पेश की। इस वर्ष परेड की मुख्य थीम भले ही राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष रही हो, लेकिन परेड में तीनों सेनाओं द्वारा प्रस्तुत ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी युद्धक तैयारियों और फॉर्मेशनों ने विशेष आकर्षण खींचा।
परेड की शुरुआत राष्ट्रध्वज फहराने और स्वदेशी 105 मिमी लाइट फील्ड गन से दी गई 21 तोपों की सलामी के साथ हुई। इसके बाद ‘विविधता में एकता’ की भावना को दर्शाते सांस्कृतिक कलाकारों की प्रस्तुति ने माहौल को देशभक्ति से भर दिया। ध्वज फॉर्मेशन में उड़ते एमआई-17 हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा ने कर्तव्य पथ को और भव्य बना दिया।

थलसेना ने टी-90 भीष्म टैंक, अर्जुन मेन बैटल टैंक, नाग मिसाइल सिस्टम और इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल के जरिए अपनी मारक क्षमता दिखाई। वायुसेना के अपाचे, प्रचंड और ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टरों ने युद्धक्षेत्र जैसी स्थिति का सजीव प्रदर्शन किया। खास आकर्षण रहा वायुसेना के लड़ाकू विमानों का सिंदूर फॉर्मेशन फ्लाईपास्ट, जिसने दर्शकों में रोमांच भर दिया।

नौसेना की झांकी ‘एक मजबूत राष्ट्र के लिए एक मजबूत नौसेना’ में विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, युद्धपोत आईएनएस उदयगिरि और पनडुब्बियों की ताकत दिखाई गई। ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, आकाश मिसाइल और एस-400 जैसे अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों ने भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूती से रेखांकित किया।
परेड में एकीकृत संचालन केंद्र और चरणबद्ध बैटल एरे फॉर्मेशन की झलक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत न केवल सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, बल्कि सामरिक दृष्टि से भी पूरी तरह सक्षम और तैयार है।

