जनगणना से पहले आवास गणना क्यों है जरूरी, जानिए इसकी अहमियत
भारत में अगली जनगणना की तैयारी शुरू हो चुकी है। केंद्र सरकार ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। यह जनगणना दो चरणों में पूरी की जाएगी। पहला चरण आवास जनगणना और हाउस लिस्टिंग का होगा, जबकि दूसरे चरण में जनसंख्या की गिनती की जाएगी।
आवास जनगणना 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगी, और इसके बाद फरवरी 2027 से जनसंख्या गणना शुरू होगी।
आवास जनगणना का मकसद देश के हर आवासीय और गैर-आवासीय घर की पहचान करना है।
इससे सरकार यह जान पाती है कि किस इलाके में कितने घर हैं और वहां कितनी आबादी रह सकती है। इसी आधार पर जनसंख्या गणना की योजना तैयार की जाती है और यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी परिवार या घर छूट न जाए। यही वजह है कि इसे मुख्य जनगणना की रीढ़ माना जाता है।

भारत में पहली बार 1881 की जनगणना में आवास संबंधी जानकारी दर्ज की गई थी। 1951 में इसे व्यवस्थित किया गया और 1961 से इसे औपचारिक रूप से लागू किया गया। इसके बाद हर दशक की जनगणना में घरों और बुनियादी सुविधाओं जैसे पेयजल, शौचालय और बिजली का डेटा भी व्यवस्थित रूप से जुटाया जाने लगा।
आवास गणना न केवल जनसंख्या आंकड़ों की तैयारी करती है, बल्कि यह विकास योजनाओं और नीति निर्माण के लिए भी महत्वपूर्ण डेटा मुहैया कराती है।
