अप्रैल 2026 से बिहार में बढ़ सकते हैं जमीन के सर्किल रेट, रजिस्ट्री कराना होगा महंगा

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पटना। बिहार में जमीन या प्लॉट खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाला समय महंगा साबित हो सकता है। निषेध, उत्पाद शुल्क और पंजीकरण विभाग, बिहार ने न्यूनतम मूल्य रजिस्टर (एमवीआर) यानी सरकारी सर्किल रेट में संशोधन की प्रक्रिया तेज कर दी है। संभावना है कि नई दरें अप्रैल 2026 से लागू होंगी, जिसके बाद रजिस्ट्री और स्टांप ड्यूटी की लागत बढ़ सकती है।


ग्रामीण क्षेत्रों में सर्किल रेट का अंतिम संशोधन वर्ष 2013 में और शहरी व आसपास के इलाकों में 2016 में किया गया था। इस दौरान बाजार में जमीन की कीमतों में काफी इजाफा हुआ, लेकिन सरकारी दरें पुराने स्तर पर ही बनी रहीं। सरकारी और बाजार दर के बीच बढ़ते अंतर के कारण पंजीकरण में कम मूल्य दर्शाने और राजस्व नुकसान की शिकायतें सामने आती रही हैं।


नई दरें तय करने के लिए विभाग 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक पंजीकृत दस्तावेजों का विश्लेषण करेगा। प्रत्येक श्रेणी में पांच सबसे अधिक और पांच सबसे कम कीमत वाले दस्तावेज चुने जाएंगे। इसके बाद सर्वे टीम बाजार दर का भौतिक सत्यापन करेगी और भूमि वर्गीकरण नियम, 2017 के आधार पर संशोधित सर्किल रेट निर्धारित किए जाएंगे।


फिलहाल स्टांप शुल्क और रजिस्ट्री शुल्क संपत्ति मूल्य का लगभग 6 से 7 प्रतिशत होता है। यदि एमवीआर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है, तो जमीन खरीदने की कुल लागत बढ़ जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि जो लोग जमीन खरीदने की तैयारी में हैं, वे मार्च 2026 से पहले रजिस्ट्री कराने पर विचार कर सकते हैं।


सर्किल रेट से जुड़ी जानकारी के लिए राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल Bhumijankari Portal या नजदीकी पंजीकरण कार्यालय से संपर्क किया जा सकता है।

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