बाल संरक्षण व पोषण सुधार को लेकर प्रशासन सख्त ज़िला स्तरीय वर्कशॉप में योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा.

सीतामढ़ी। जिले में बाल संरक्षण और पोषण सुधार पर प्रशासन का फोकस जिला स्तर पर वर्कशॉप, योजनाओं की प्रगति की गहन समीक्षा बाल संरक्षण व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने तथा बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार के उद्देश्य से जिले में जिला स्तरीय वर्कशॉप सह समीक्षात्मक बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता डीपीओ आईसीडीएस सरिता कुमारी ने की।
यह बैठक जिला बाल संरक्षण इकाई (District Child Protection Unit – DCPU) के तत्वावधान में आयोजित हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले में बाल संरक्षण, सुरक्षा एवं पुनर्वास से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करना रहा। बैठक में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों, शिक्षा विभाग तथा सहयोगी संस्थाओं—पिरामल फाउंडेशन और अदिति संस्था—द्वारा संचालित कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा की गई। विशेष रूप से असुरक्षित बच्चों की पहचान, पुनर्वास एवं परामर्श सेवाएं, बाल श्रम, बाल विवाह तथा स्कूल से बाहर बच्चों (OOSC) से संबंधित मामलों पर गहन चर्चा हुई।
समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई, अंतरविभागीय समन्वय और नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों की क्षमता संवर्धन एवं फील्ड स्तर पर प्रभावी निगरानी पर भी विशेष बल दिया गया। साथ ही सभी अति कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें सदर अस्पताल सीतामढ़ी स्थित NRC (पोषण पुनर्वास केंद्र) भेजने तथा उनकी स्वास्थ्य स्थिति में सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

इस अवसर पर बाल संरक्षण समिति के पदाधिकारी, आईसीडीएस की जिला समन्वयक रूपम कुमारी, सभी सीडीपीओ, सभी महिला पर्यवेक्षिकाएं, संबंधित अधिकारी, पिरामल फाउंडेशन के जिला प्रबंधक प्रभाकर कुमार, प्रोग्राम लीडर अभिषेक राज, रोहित कुमार, दुर्गा प्रसाद, गांधी फैलो विवेक कुमार एवं अनामिका कुमारी तथा अदिति संस्था के प्रतिनिधि मनीष कुमार सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी अवधि में लंबित मामलों की विशेष समीक्षा, जनजागरूकता कार्यक्रमों को गति देने तथा विभागीय समन्वय को और मजबूत करने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाई जाएगी। सभी महिला पर्यवेक्षिकाओं को अन्नप्राशन दिवस, गोदभराई दिवस और टीकाकरण कार्यक्रमों को उत्सव के माहौल में आयोजित करते हुए समुदाय और पंचायत प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
