मतदाता सूची और नागरिकता जांच का अधिकार चुनाव आयोग को: सुप्रीम कोर्ट में आयोग की दलील
New Delhi: चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि मतदाता सूची और चुनाव संचालन से जुड़े मामलों में वही मूल और सक्षम प्राधिकारी है।
आयोग ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य देश की नागरिकता हासिल करता है, तो चुनावी उद्देश्य से उसकी नागरिकता की जांच करने का अधिकार आयोग के पास है, और इस संबंध में उसकी राय राष्ट्रपति पर बाध्यकारी होती है।
आयोग ने यह भी साफ किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ प्रतिकूल निष्कर्ष निकलता है, तो उसका परिणाम केवल मतदाता सूची से नाम हटाने तक सीमित रहेगा। इससे किसी व्यक्ति का स्वतः निर्वासन नहीं होगा। हालांकि, ऐसे मामलों को नागरिकता अधिनियम के तहत आगे की जांच और संभावित कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार को भेजा जा सकता है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने आयोग की ओर से दलीलें पेश कीं। उन्होंने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि संसद ने आयोग को दीवानी अदालत जैसी शक्तियां दी हैं।
पीठ बिहार समेत कई राज्यों में SIR को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें नागरिकता और मतदान के अधिकार से जुड़े संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं।
