डिजिटल जनगणना 2027 की तैयारी पूरी, 1 अप्रैल 2026 से शुरू होगा पहला चरण, देने होंगे 33 सवालों के जवाब…
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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना की तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। सरकार द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, जनगणना दो चरणों में कराई जाएगी। पहले चरण की शुरुआत 1 अप्रैल 2026 से होगी, जिसमें घरों और आवासों से जुड़ी विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस चरण में नागरिकों से कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे।
दो चरणों में होगी जनगणना
पहला चरण – हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस
यह चरण 1 अप्रैल 2026 से 30 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें मकानों की स्थिति, निर्माण सामग्री, स्वामित्व, बुनियादी सुविधाएं और परिवार से जुड़ी जानकारी दर्ज की जाएगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में यह प्रक्रिया लगभग 30 दिनों में पूरी की जाएगी। खास बात यह है कि गणना शुरू होने से 15 दिन पहले नागरिकों को ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेशन की सुविधा भी दी जाएगी।

दूसरा चरण – जनसंख्या गणना
यह चरण फरवरी 2027 में होगा, जिसमें जनसंख्या, जाति, धर्म, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से संबंधित आंकड़े जुटाए जाएंगे।
पूरी तरह डिजिटल होगी जनगणना
इस बार की जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। करीब 30 लाख गणनाकर्मी एंड्रॉयड और iOS आधारित मोबाइल ऐप के माध्यम से डेटा एकत्र करेंगे, जो रीयल-टाइम में सर्वर पर अपलोड होगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब जाति आधारित गणना को शामिल किया जाएगा। इससे पहले 1931 में अंतिम बार जाति गणना हुई थी।

हर घर बनेगा ‘डिजी डॉट’
जनगणना के तहत हर घर को डिजिटल मैप पर ‘डिजी डॉट’ के रूप में चिन्हित किया जाएगा। इससे आपदा प्रबंधन में बड़ी मदद मिलेगी। बाढ़, भूकंप या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के समय प्रभावित घरों और वहां रहने वाले लोगों की सटीक जानकारी तुरंत मिल सकेगी। इसके अलावा संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन में भी यह डेटा उपयोगी साबित होगा।
पहले चरण में पूछे जाएंगे ये 33 सवाल
पहले चरण में मकान और परिवार से जुड़ी बुनियादी जानकारी ली जाएगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
1. भवन नंबर (नगर/स्थानीय प्राधिकारी अथवा जनगणना नंबर),
2. मकान नंबर,
3. मकान के फर्श में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री,
4. मकान की दीवारों में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री,
5. मकान की छत में प्रयुक्त प्रमुख सामग्री,
6. मकान का उपयोग,
7. मकान की हालत,
8. परिवार क्रमांक,
9. परिवार के सदस्यों की कुल संख्या,
10. परिवार के मुखिया,
11. परिवार के मुखिया का लिंग,
12. अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / अन्य,
13. मकान के स्वामित्व की स्थिति,
14. मकान में कमरों की संख्या,
15. परिवार में विवाहित दंपतियों की संख्या,
16. पेयजल का मुख्य स्रोत,
17. पेयजल स्रोत की उपलब्धता,
18. लाइट (बिजली) का मुख्य स्रोत,
19. शौचालय की उपलब्धता,
20. शौचालय का प्रकार,
21. गंदे पानी की निकासी,
22. स्नानघर की उपलब्धता,
23. रसोईघर, एलपीजी/पीएनजी कनेक्शन,
24. खाना पकाने के लिए मुख्य ईंधन,
25. रेडियो/ट्रांजिस्टर,
26. टेलीविजन,
27. इंटरनेट सुविधा,
28. लैपटॉप/कंप्यूटर,
29. टेलीफोन/मोबाइल फोन/स्मार्ट फोन,
30. साइकिल/स्कूटर/मोटरसाइकिल/मोपेड,
31. कार/जीप/वैन,
32. मुख्य अनाज,
33. मोबाइल नंबर

सरकार का मानना है कि डिजिटल जनगणना से डेटा अधिक सटीक, तेज और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध होगा, जिससे नीति निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन में बड़ा सुधार आएगा।
Author: 𝑀𝑑 𝑃𝑎𝑟𝑣𝑒𝑧
