इज़राइल संसद में पीएम मोदी का संबोधन: आतंकवाद पर ‘शून्य सहिष्णुता’ और शांति प्रक्रिया पर जोर

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नरेंद्र मोदी ने इज़राइल दौरे के दौरान संसद को संबोधित करते हुए आतंकवाद के खिलाफ कड़ा संदेश दिया। 7 अक्टूबर के हमलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि निर्दोष लोगों की हत्या किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और पूरी दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड नहीं अपनाया जाना चाहिए।


तेल अवीव पहुंचने पर उनका स्वागत बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी ने किया। उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। संसद में संबोधन के दौरान माहौल सौहार्दपूर्ण रहा और दोनों देशों की मित्रता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति पर चलता है और हर निर्दोष जीवन की हानि पर शोक व्यक्त करता है। उन्होंने गाजा से जुड़े हालात का जिक्र करते हुए कहा कि स्थायी समाधान के लिए संवाद, संतुलन और मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अनुमोदित शांति पहलों का समर्थन किया है और न्यायसंगत समाधान की आवश्यकता पर बल दिया है।


भारत-इज़राइल संबंधों को उन्होंने “स्वाभाविक साझेदारी” बताया। सुरक्षा सहयोग, कृषि नवाचार, प्रौद्योगिकी, स्टार्टअप और व्यापार को इस रिश्ते की मजबूत नींव बताया गया। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद इज़राइल ने नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं, जबकि भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था और तकनीकी विकास का केंद्र बन रहा है।


अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान इस क्षेत्र में शहीद हुए भारतीय सैनिकों को भी श्रद्धांजलि दी और दोनों देशों के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक संबंधों को याद किया। इस दौरे को भारत-इज़राइल संबंधों में एक नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है, जहां सुरक्षा के साथ-साथ शांति और विकास पर समान रूप से जोर दिया गया।

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