उन्नाव कांड: न्याय पर फिर उठे सवाल, कुलदीप सेंगर को जमानत से देश में आक्रोश, ये कैसा न्याय.?

Crime: उन्नाव गैंगरेप कांड एक बार फिर सुर्खियों में है। भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, जिसे एक नाबालिग के साथ बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। कोर्ट ने 15 लाख रुपये के बॉन्ड पर सजा निलंबित करते हुए जमानत दी और शर्त रखी कि सेंगर पीड़िता के पांच किलोमीटर के दायरे में नहीं जाएगा।
यह वही मामला है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया था। पीड़िता के पिता की पुलिस कस्टडी में मौत, कार हादसे में पीड़िता की बुआ और वकील की जान जाना, और खुद पीड़िता का महीनों वेंटिलेटर पर रहना—इन तमाम घटनाओं में सेंगर की भूमिका पर सवाल उठते रहे और उसे दोषी भी ठहराया गया। ऐसे में अब जमानत मिलने के फैसले ने न्याय व्यवस्था पर फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पीड़िता की हालत बेहद चिंताजनक बताई जा रही है। उसका कहना है कि उसे अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर डर सता रहा है और वह खुद को पूरी तरह असहाय महसूस कर रही है। सवाल यह है कि केवल दूरी की शर्त क्या वाकई सुरक्षा की गारंटी बन सकती है? अगर पीड़िता या उसके परिजनों के साथ कुछ अनहोनी होती है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश में महिला सुरक्षा और न्याय को लेकर पहले से ही गुस्सा और अविश्वास गहराता जा रहा है। क्या महिलाएं न्याय की उम्मीद छोड़ने को मजबूर होंगी? क्या रसूखदार दोषियों के लिए कानून अलग और आम नागरिकों के लिए अलग है?
उन्नाव कांड में आया यह नया मोड़ सिर्फ एक कानूनी आदेश नहीं, बल्कि देश की न्याय व्यवस्था की कसौटी है—जिसका जवाब अब सिस्टम को देना होगा।
