देश में वोटर लिस्ट को लेकर बड़ा सवाल, 10–12 करोड़ नाम कटने के दावों से मचा सियासी बवाल

National: देशभर में मतदाता सूची को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों का दावा है कि 10 से 12 करोड़ मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटे जा रहे हैं, जिससे लोकतंत्र की बुनियाद पर ही खतरा मंडराने लगा है। इस पूरे विवाद को और गहरा कर दिया है RTI के तहत मिले चुनाव आयोग के जवाब, जिसमें कहा गया है कि SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) का फैसला चुनाव आयोग ने नहीं लिया।
इस जवाब के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि अगर चुनाव आयोग ने यह फैसला नहीं लिया, तो फिर किसके निर्देश पर देशभर में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण किया जा रहा है?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि SIR जैसी प्रक्रिया आमतौर पर चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती है। ऐसे में आयोग का यह कहना कि उसने खुद यह निर्णय नहीं लिया, कई शंकाओं को जन्म देता है। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर वोटर लिस्ट में बदलाव कर खास वर्ग के मतदाताओं को बाहर किया जा रहा है, ताकि चुनावी नतीजों को प्रभावित किया जा सके।
वहीं चुनाव आयोग की ओर से यह सफाई दी जा रही है कि मतदाता सूची की शुद्धता बनाए रखने के लिए समय-समय पर पुनरीक्षण आवश्यक है और यह प्रक्रिया कानून के तहत होती है। हालांकि, आयोग के RTI जवाब ने उसकी भूमिका को लेकर भ्रम पैदा कर दिया है।
लोकतंत्र में वोट देने का अधिकार नागरिक का मूल अधिकार माना जाता है। ऐसे में करोड़ों वोटरों के नाम कटने की खबरें और आयोग की अस्पष्ट स्थिति जनता के भरोसे को कमजोर कर सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे मामले में पारदर्शिता और स्पष्ट जवाब बेहद जरूरी है।
अब सवाल यही है—
इस देश में चल क्या रहा है?
क्या मतदाता सूची में हो रहे बदलाव महज प्रशासनिक प्रक्रिया हैं या लोकतंत्र से छेड़छाड़?
इस पर देश की निगाहें टिकी हैं।
रिपोर्ट: मो परवेज़

Nice journalism
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