काग़ज़ों में मृत, हक़ीक़त में ज़िंदा: चार बुज़ुर्गों की पेंशन बंद, प्रशासन की बड़ी लापरवाही उजागर

सीतामढ़ी जिला से एक बेहद चौंकाने वाला और संवेदनहीन मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जिले के सोनबरसा प्रखंड अंतर्गत पुरंदाहा राजवाड़ा पश्चिमी पंचायत में चार ज़िंदा बुज़ुर्गों को सरकारी रिकॉर्ड में “मृत” घोषित कर दिया गया, जिसके चलते उनकी वृद्धा/वृद्ध पेंशन बंद हो गई।
यह पेंशन उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत सचिव की घोर लापरवाही या मनमानी के कारण यह गंभीर प्रशासनिक चूक हुई है। पीड़ित बुज़ुर्गों का कहना है कि वे पूरी तरह जीवित हैं, इसके बावजूद सरकारी काग़ज़ों में उन्हें मृत दर्शाया गया। बिना किसी पूर्व सूचना के पेंशन रोक दिए जाने से वे अब अपनी पहचान और हक़ के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
पीड़ित बुज़ुर्गों की पीड़ा
बिना सूचना के पेंशन बंद
सरकारी रिकॉर्ड में गलत तरीके से “मृत” दर्ज
बार-बार कार्यालयों के चक्कर, लेकिन समाधान नहीं
शारीरिक व मानसिक रूप से अत्यधिक परेशान
ग्रामीणों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि एक गंभीर प्रशासनिक अपराध है। यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो प्रभावित बुज़ुर्गों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
पंचायत सचिव संपर्क से बाहर
मामले को लेकर पंचायत सचिव से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे कोई जवाब नहीं मिल सका। इससे ग्रामीणों में आक्रोश और भी बढ़ गया है।
प्रशासन और मंत्री से सीधे सवाल
अब सवाल सीधे तौर पर
👉 जिला प्रशासन
👉 समाज कल्याण विभाग
👉 संबंधित मंत्री महोदय
से किए जा रहे हैं—
ज़िंदा लोगों को मृत घोषित करने के जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी?
बुज़ुर्गों की पेंशन कब बहाल की जाएगी?
क्या दोषी पंचायत सचिव पर एफआईआर दर्ज होगी?
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो वे प्रखंड और जिला स्तर पर आंदोलन करेंगे।
यह सिर्फ पेंशन का मामला नहीं, बल्कि इंसान के अस्तित्व को काग़ज़ों में खत्म करने जैसा गंभीर विषय है।
रिपोर्ट: नसीम अहमद,
