बाल विवाह मुक्त भारत अभियान का असर दिखने लगा, डुमरा में सीपीसी बैठक से बाल संरक्षण को बल

सीतामढ़ी। डुमरा प्रखंड स्तर पर सरकार की बाल संरक्षण एवं बाल विवाह उन्मूलन से जुड़ी योजनाओं का समाज पर सकारात्मक और दूरगामी प्रभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी कामिनी कुमारी की अध्यक्षता में बाल संरक्षण समिति (CPC) की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें प्रखंड स्तर के विभिन्न विभागों के पदाधिकारियों ने सक्रिय सहभागिता की।
बैठक में पिरामल फाउंडेशन एवं अदीथि संस्था के प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाया। इस दौरान 100 दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान पर विस्तृत चर्चा की गई और इसके सामाजिक प्रभावों की समीक्षा की गई।
अधिकारियों ने माना कि इस अभियान से न केवल बाल विवाह के मामलों में कमी आ रही है, बल्कि समाज में बाल अधिकारों को लेकर जागरूकता भी तेजी से बढ़ी है। बैठक के दौरान बाल संरक्षण से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
सीपीसी के माध्यम से बाल संरक्षण तंत्र मजबूत हो रहा है, जिससे बाल श्रम, बाल विवाह, शोषण, हिंसा एवं उपेक्षा जैसे मामलों की समय रहते पहचान और रोकथाम संभव हो पा रही है। महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस तथा पंचायत प्रतिनिधियों के बीच विभागीय समन्वय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है।
पंचायत एवं वार्ड स्तर पर बच्चों से जुड़ी वास्तविक स्थानीय समस्याओं की पहचान हो रही है, जिससे समाधान भी स्थानीय स्तर पर ही किया जा सकता है। जोखिम में पड़े बच्चों—जैसे स्कूल छोड़ चुके, श्रम में लगे या दुर्व्यवहार के शिकार बच्चों—पर त्वरित निर्णय एवं रेफरल की व्यवस्था सशक्त हुई है। इसके साथ ही समुदाय में बाल अधिकारों और सरकारी योजनाओं को लेकर जागरूकता बढ़ी है तथा ICPS, ICDS, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन एवं नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो रही है।
अध्यक्षता करते हुए कामिनी कुमारी ने सभी संबंधित विभागों के बीच समन्वय को और मजबूत करने तथा सीपीसी की नियमित बैठकों के माध्यम से बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया।
उन्होंने बैठक में लिए गए निर्णयों के शीघ्र क्रियान्वयन के लिए संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। बैठक में पिरामल फाउंडेशन प्रोग्राम लीडर अभिषेक राज, गांधी फेलो दिव्या चौहान, अदीथि कवच परियोजना टीम से मनीष कुमार, बचपन बचाओ से साक्षी कुमारी, एसोसिएशन फॉर वॉलंटरी एक्शन से मुकुंद चौधरी, प्रथम संस्था से सुधीर कुमार, सभी महिला पर्यवेक्षिकाएं एवं ब्लॉक कोऑर्डिनेटर उपस्थित रहे।
इसके साथ ही पिरामल फाउंडेशन के प्रतिनिधि द्वारा आगामी 10 फरवरी से शुरू होने वाले एमडीए राउंड में सभी योग्य बच्चों एवं अन्य लाभार्थियों को फाइलेरिया उन्मूलन हेतु डीईसी एवं एलबेंडाजोल की गोलियां खिलवाने में सहयोग करने की अपील की गई। कुल मिलाकर, सरकार की यह योजना और सीपीसी की नियमित बैठकें समाज में बाल संरक्षण को मजबूत आधार प्रदान कर रही हैं।
इससे न केवल बच्चों के अधिकार सुरक्षित हो रहे हैं, बल्कि बाल विवाह और बाल श्रम जैसी सामाजिक कुरीतियों पर प्रभावी नियंत्रण भी संभव हो पा रहा है। यह पहल समाज को एक सुरक्षित, जागरूक और जिम्मेदार दिशा में आगे बढ़ाने का सशक्त माध्यम बन रही है ।
रिपोर्ट: नसीम अहमद,
