मणिपुर हिंसा का दर्दनाक सच: सामूहिक बलात्कार के सदमे से जूझती युवती की मौत

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मणिपुर में जातीय हिंसा के दौरान हुए एक जघन्य अपराध ने एक परिवार की ज़िंदगी हमेशा के लिए उजाड़ दी। कुकी-ज़ो और मैतेई समुदायों के बीच भड़की हिंसा के बीच अपहरण और सामूहिक बलात्कार का शिकार हुई 20 वर्षीय युवती की 11 जनवरी की शाम मौत हो गई। घटना के बाद से वह गहरे मानसिक और शारीरिक आघात से जूझ रही थी।


युवती की मां ने बीबीसी न्यूज़ से बात करते हुए बताया कि उनकी बेटी बलात्कार की घटना के बाद पूरी तरह टूट चुकी थी। यौन हिंसा के डर ने उसके मन में ऐसा घर कर लिया था कि कई बार वह घबराहट में सांस तक नहीं ले पाती थी। मां ने कहा, “मुझे उम्मीद थी कि वह ठीक हो जाएगी। पिछले ढाई साल से मैं उसे इलाज के लिए कांगपोकपी से लेकर गुवाहाटी तक के अस्पतालों में ले जाती रही, लेकिन उसे बचा नहीं सकी।”


मां के मुताबिक, बेटी की हालत समय के साथ और बिगड़ती चली गई। उसने लोगों से मिलना-जुलना बंद कर दिया था और ज़्यादातर समय घर में ही रहती थी। वह किसी से बात नहीं करना चाहती थी और कभी-कभी बाइबल पढ़ती रहती थी। उसका इलाज एक साइकियाट्रिस्ट और एंडोक्रिनोलॉजिस्ट की देखरेख में चल रहा था और वह नियमित दवाएं ले रही थी।


11 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत और खराब हो गई। पहले उसे उल्टियां हुईं और फिर सांस लेने में दिक्कत शुरू हो गई। दोपहर करीब तीन बजे उसने दम तोड़ दिया।


मां ने उस भयावह घटना को याद करते हुए बताया कि 15 मई 2023 की शाम इंफाल के न्यू-चेकॉन इलाके में एक एटीएम के पास से उनकी बेटी का अपहरण कर लिया गया था।

आरोप है कि अपहरण के बाद उसे पहले एक सफेद रंग की कार में ले जाया गया, जहां उसके साथ मारपीट की गई। इसके बाद लैंगोल के एक सुनसान इलाके में उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।


यह मामला न सिर्फ मणिपुर में हुई हिंसा के दौरान महिलाओं पर हुए अत्याचारों की भयावह तस्वीर पेश करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि ऐसे अपराधों का असर पीड़ितों और उनके परिवारों पर कितनी गहरी और लंबी छाया छोड़ जाता है।

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