टेलीग्राम पर ठगी का खुला खेल, साइबर क्राइम गहरी नींद में? लुटते रहे लोग, सिस्टम बना मूकदर्शक
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डिजिटल डेस्क: इन्वेस्टमेंट के नाम पर साइबर ठगी आज किसी छिपे हुए कोने में नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और टेलीग्राम पर खुलेआम चल रही है। ठग “गारंटीड रिटर्न”, “लॉस कवर प्लान” और “सरकारी वेरिफाइड चैनल” जैसे भ्रामक दावे लिखकर लोगों को दिनदहाड़े लूट रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि साइबर क्राइम, साइबर पुलिस और साइबर क्राइम ब्रांच आखिर कर क्या रही है?
हजारों रुपये जमा करो और कुछ ही घंटों में लाखों कमाओ — ऐसी स्कीमें खुलेआम पोस्ट हो रही हैं। लिंक, चैनल, नंबर सब सार्वजनिक हैं। ठग न तो छिप रहे हैं, न डर रहे हैं। उल्टा वे 25 प्रतिशत कमीशन पहले मांग रहे हैं और पैसा जाते ही लोगों को ब्लॉक कर दे रहे हैं। इसके बावजूद न चैनल हट रहे हैं, न ठग पकड़े जा रहे हैं।
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पीड़ितों का आरोप है कि शिकायत करने के बाद सिर्फ एक शिकायत नंबर थमा दिया जाता है। न पैसा वापस, न आरोपी पर कार्रवाई। साइबर हेल्पलाइन 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल सिर्फ कागजी औपचारिकता बनकर रह गए हैं। आम आदमी सवाल पूछ रहा है — अगर इतने खुले सबूतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होगी, तो फिर साइबर सिक्योरिटी का मतलब क्या है?
साइबर एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि “गारंटीड रिटर्न” पूरी तरह फर्जी होता है, फिर भी ऐसे चैनल बेखौफ चल रहे हैं। इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि या तो सिस्टम बेहद कमजोर है, या फिर ठगों को किसी तरह का डर ही नहीं रह गया है।

अब जनता पूछ रही है —
क्या साइबर पुलिस सिर्फ बड़े मामलों का इंतजार कर रही है?
क्या छोटे निवेशकों का पैसा डूबना कोई मुद्दा नहीं है?
और अगर यही हाल रहा, तो साइबर ठगी के खिलाफ बने कानून आखिर किस काम के हैं?
लोगों की मांग है कि ऐसे फर्जी इन्वेस्टमेंट नेटवर्क पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो, वरना यह साइबर अपराध एक बड़ी आर्थिक लूट में बदल जाएगा — और इसकी पूरी जिम्मेदारी सिस्टम की निष्क्रियता पर होगी।
कुछ सुबूत जो हमारे पास है।

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