बिहार में लोकतंत्र पर सवाल: 31 साल पुराने मामले में आधी रात को सांसद पप्पू यादव गिरफ्तार, विपक्ष ने बताया राजनीतिक बदले की कार्रवाई

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Bihar: पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव को शुक्रवार देर रात (6 फरवरी 2026) पटना पुलिस ने उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी 31 साल पुराने एक मामले में की गई, जिसे लेकर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आधी रात को हुई इस कार्रवाई को विपक्ष और समर्थकों ने सत्ता का दुरुपयोग और राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है।


पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए पटना स्थित आवास पर पहुंची, जहां पप्पू यादव ने रात में थाने ले जाने का विरोध किया और पहले अपने वकील से बात करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे सुबह अदालत में पेश होने को तैयार हैं, लेकिन पुलिस ने उनकी एक न सुनी। इसके बाद भारी संख्या में पुलिस बल बुलाया गया और पटना के एसपी भानु प्रताप स्वयं मौके पर पहुंचे। घंटों चली बहस और हंगामे के बाद आखिरकार सांसद को जबरन हिरासत में ले लिया गया।


बताया जा रहा है कि यह मामला वर्ष 1995 का है, जिसमें धोखाधड़ी से मकान किराए पर लेने का आरोप लगाया गया है। इसी केस में पटना की अदालत ने हाल ही में कुर्की का आदेश दिया था। सवाल यह उठता है कि तीन दशक पुराने मामले में अचानक आधी रात की गिरफ्तारी क्यों जरूरी हो गई?


गिरफ्तारी के बाद पुलिस पप्पू यादव को सीधे बेली रोड स्थित आईजीआईएमएस ले गई, जहां उनकी मेडिकल जांच कराई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में समर्थक भी अस्पताल पहुंच गए।


गौरतलब है कि हाल के दिनों में पप्पू यादव ने पटना में NEET छात्रा की संदिग्ध मौत को लेकर नीतीश सरकार पर तीखे सवाल खड़े किए थे और सीबीआई जांच की मांग को लेकर सड़क से संसद तक आवाज बुलंद की थी। उनका आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर घिरी हुई है और इसी वजह से उनके खिलाफ पुराने मामलों को निकालकर बदले की कार्रवाई की जा रही है।


इस पूरी घटना ने बिहार में कानून-व्यवस्था, लोकतांत्रिक अधिकारों और सत्ता के दुरुपयोग को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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