चुनाव की आड़ में विधायी कार्य नहीं कर सकता चुनाव आयोग, SIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दलील…

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Delhi: वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा कि चुनाव आयोग चुनाव कराने की आड़ में संसद और विधानसभाओं की विशुद्ध रूप से विधायी गतिविधियों को अपने ऊपर नहीं ले सकता। कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उन्होंने यह दलील दी।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के अधिकारों की विस्तृत जांच की, जबकि अभिषेक सिंघवी और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्सिंघवी ने कहा कि चुनाव आयोग चुनाव कराने की आड़ में विधायी कार्य नहीं कर सकता। संवैधानिक प्रविधानों के तहत सिर्फ संसद और राज्य विधानसभाएं यह कार्य कर सकती हैं। किसी भी मानक से यह नहीं कहा जा सकता कि चुनाव आयोग संविधान की योजना के अंतर्गत विधायी प्रक्रिया में एक तीसरा सदन है।

केवल संविधान का अंग होने से उसे विधानसभाओं द्वारा बनाए गए कानून का संदर्भ लिए बिना अपनी इच्छा के अनुसार कानून बनाने की पूर्ण शक्ति नहीं मिल जाती है। चुनाव आयोग इसकी आड़ में मूलभूत परिवर्तन कर रहा है।

सिंघवी ने जून 2025 में जारी किए गए एक फार्म पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें सत्यापन के लिए 11 से 12 विशेष दस्तावेज की आवश्यकता थी। उन्होंने पूछा कि नियमों में यह कहां है? केवल वैधानिक शक्ति से यह फार्म जारी हो सकता है। सिब्बल ने अपनी दलीलें पूरी करते हुए बूथ लेवल अधिकारियों की शक्ति पर सवाल उठाया।बल ने तर्क दिया कि चुनाव आयोग अपनी संवैधानिक सीमाओं से बाहर जा रहा है। यह एसआइआर के दौरान नागरिकों पर अनुचित प्रक्रियात्मक बोझ डाल रहा है।

Input:  PTI

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