सीतामढ़ी में डीएम की सख्त कार्रवाई: वित्तीय अनियमितता में लिपिक बर्खास्त, दो चौकीदारों पर भी गिरी गाज

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सीतामढ़ी। जिले में वित्तीय अनियमितता, गबन और कर्तव्य में लापरवाही के मामलों को लेकर जिलाधिकारी रिची पाण्डेय ने सख्त रुख अपनाते हुए कई कर्मियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। इस क्रम में तीन लिपिकों पर विभागीय कार्रवाई की गई है, जबकि दो चौकीदारों को भी दंडित किया गया है।


जानकारी के अनुसार अंचल कार्यालय डुमरा के तत्कालीन लिपिक दिलीप कुमार (वर्तमान पदस्थापन प्रखंड कार्यालय रूनीसैदपुर) पर वित्तीय अनियमितता और गबन से जुड़े चार गंभीर आरोप लगाए गए थे। विभागीय जांच में सभी आरोप प्रमाणित पाए गए। इसके बाद द्वितीय कारण पृच्छा का जवाब असंतोषजनक मिलने पर जिलाधिकारी ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया। साथ ही उनके सभी सेवांत लाभ और जमा राशि जब्त करने तथा भविष्य में किसी भी सरकारी संस्थान में सेवा का अवसर नहीं देने का भी निर्णय लिया गया है।


वहीं सेवा निवृत्त लिपिक दिगंबर पांडे के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। वे करीब साढ़े तीन वर्षों तक अनधिकृत रूप से अनुपस्थित पाए गए थे। विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद उनके पेंशन में 10 प्रतिशत की कटौती करने का आदेश दिया गया है।


इसके अलावा अकिल अंजुम, जो पहले प्रखंड कार्यालय नानपुर में पदस्थापित थे और वर्तमान में बाजपट्टी प्रखंड कार्यालय में कार्यरत हैं, उनके विरुद्ध भी अंचल अधिकारी एवं अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा भेजे गए आरोप पत्र के आधार पर विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है। उन पर वित्तीय अनियमितता, गबन तथा नजारत का प्रभार नहीं देने जैसे आरोप लगाए गए हैं।


इधर कर्तव्य में लापरवाही को लेकर दो चौकीदारों पर भी कार्रवाई की गई है। थाना बाजपट्टी के बीट संख्या 07/01 की महिला चौकीदार सीता कुमारी को एक अभियुक्त के न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के दौरान उसके भाग जाने की घटना में लापरवाही पाए जाने पर दो वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया गया है।


वहीं थाना डुमरा के चौकीदार रामलगन राय पर भी अनुशासनहीनता का आरोप साबित होने पर कार्रवाई की गई है। वे वर्ष 2022 में दर्ज एक मामले के बाद गिरफ्तारी के डर से बिना सूचना के लंबे समय तक अनुपस्थित पाए गए थे। इस मामले में उन्हें दो वेतन वृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का दंड दिया गया है।


जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि वित्तीय अनियमितता, अनुशासनहीनता और कर्तव्य में लापरवाही के मामलों में किसी भी स्तर पर ढिलाई नहीं बरती जाएगी और दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के विरुद्ध आगे भी कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी।

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