पंजाब में बड़ा अलर्ट: जालंधर–अमृतसर समेत कई जिलों पर खतरे की घंटी, लोगों को सतर्क रहने की अपील…

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Chandigarh: देश का भूकंप खतरा नक्शा बदल गया है और इसका सीधा असर पंजाब पर भी पड़ा है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने नया IS 1893 (2025) सीस्मिक मैप जारी किया है, जिसमें अब देश का 61% हिस्सा मध्यम से उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्र में शामिल हो गया है। सबसे बड़ा बदलाव है सबसे खतरनाक ज़ोन VI का जोड़ना।



देश के नए भूकंप नक्शे के अनुसार अब 75% आबादी सक्रिय भूकंप क्षेत्रों में रहती है। पहले चार ज़ोन थे, लेकिन अब पांच ज़ोन बना दिए गए हैं और एक नया ज़ोन VI जोड़ा गया है।

भूकंप ज़ोन विवरण:
ज़ोन II: सबसे कम खतरा, 11% भूमि
ज़ोन III: मध्यम खतरा, 30% भूमि
ज़ोन IV: उच्च खतरा, दिल्ली–एनसीआर शामिल, 18% भूमि
ज़ोन V: बेहद उच्च खतरा, कच्छ और पूर्वोत्तर, 11% भूमि
नया ज़ोन VI: सबसे अधिक खतरा, पूरा हिमालयी क्षेत्र, चंडीगढ़ और पंचकूला शामिल
नक्शे के अनुसार हिमालय के पास के क्षेत्रों में भूकंप की तीव्रता सबसे ज़्यादा हो सकती है।

चंडीगढ़ और पंचकूला अब ‘ज़ोन VI’ में
नए नक्शे में चंडीगढ़ और उससे लगे पंचकूला को सबसे खतरनाक ज़ोन VI में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब है कि इन क्षेत्रों में भविष्य में बहुत तीव्र भूकंप आने की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि यह क्षेत्र हिमालय की सक्रिय फॉल्ट लाइनों के बेहद करीब स्थित है। इस ज़ोन में इमारतों को अब अधिक मजबूत नियमों के तहत बनाना होगा।

अमृतसर–जालंधर ‘ज़ोन V’ में
पंजाब के बड़े शहर अमृतसर और जालंधर को अब ज़ोन V (बहुत उच्च जोखिम) में रखा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस ज़ोन में आने का मतलब है कि यहां बड़े और नुकसानदायक भूकंप की संभावना पहले से अधिक है। हरियाणा के अंबाला और करनाल भी इसी ज़ोन में शामिल हैं।

ज़ोन VI और V में बनने वाली सभी नई इमारतों, पुलों और अस्पतालों के लिए अब सख़्त निर्माण मानक लागू होंगे। फाउंडेशन को 50% तक मजबूत करना पड़ सकता है और स्टील का उपयोग लगभग दोगुना होना संभव है। इससे निर्माण लागत 10–20% तक बढ़ सकती है, लेकिन सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह कदम आवश्यक माना गया है।

नए सीस्मिक मैप के साथ सरकार और विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि पंजाब के संवेदनशील इलाकों में लोगों को जागरूक रहना और सुरक्षित निर्माण को प्राथमिकता देना बेहद जरूरी है।

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