भारत: हर साल 2 लाख भारतीय विदेश में बस रहे, 5 सालों में 9 लाख ने छोड़ी नागरिकता

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New Delhi: देश से विदेश जाकर बसने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि हर साल करीब 2 लाख भारतीय नागरिकता छोड़कर विदेश में स्थायी रूप से बस रहे हैं। बीते 5 वर्षों में लगभग 9 लाख भारतीयों ने अपनी नागरिकता त्याग दी है।

सरकार के अनुसार, 2021 के बाद भारतीय नागरिकता छोड़ने वालों की संख्या में तेज़ बढ़ोतरी देखने को मिली है। कोरोना महामारी के बाद वैश्विक स्तर पर खुले अवसर, बेहतर रोजगार, शिक्षा और जीवनशैली की तलाश को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने बताया कि वर्ष 2019 और 2020 की तुलना में 2021, 2022 और 2023 में नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की संख्या कहीं अधिक रही। खासतौर पर युवा वर्ग और उच्च शिक्षा प्राप्त पेशेवर विदेशों में बेहतर भविष्य की उम्मीद में देश छोड़ रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और खाड़ी देश भारतीयों की पहली पसंद बने हुए हैं। इनमें आईटी, हेल्थकेयर, मैनेजमेंट और रिसर्च से जुड़े लोग बड़ी संख्या में शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इसे केवल ‘ब्रेन ड्रेन’ के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक वैश्विक प्रवृत्ति भी है। हालांकि, सरकार का कहना है कि देश में रोजगार और स्टार्टअप के अवसर बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि युवाओं को भारत में ही बेहतर भविष्य मिल सके।

बढ़ती प्रवासन दर को लेकर अब यह बहस भी तेज हो गई है, कि क्या भारत अपने प्रतिभाशाली मानव संसाधन को बनाए रखने में सफल हो पा रहा है या नहीं।

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